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राज्यसभा चुनाव को लेकर कांग्रेस की एक सप्ताह से जयपुर मे जारी बाड़ेबंदी -  कांग्रेस समर्थक विधायकों के केम्प मे मुस्लिम विधायक अपनी मांग नही रख पाये।
June 15, 2020 • ।अशफाक कायमखानी।


            ।अशफाक कायमखानी।
जयपुर।
             उन्नीस जून को राजस्थान के तीन राज्यसभा सदस्यो के होने वाले चुनाव को लेकर कांग्रेस ने उनके विधायकों व सरकार को समर्थन दे रहे निर्दलीय विधायको को प्रभोलन देकर पाला बदल करवाने के साजिश करने का भाजपा नेताओं पर आरोप लगाते हुये मुख्यमंत्री अशोक गहलोत द्वारा कांग्रेस व सरकार को समर्थन दे रहे निर्दलीय विधायकों को अपने निवास पर बैठक के बहाने बूलाकर अचानक उनको एक होटल भेजकर एक तरह से जमा करके कोराना वायरस के खोफ व लोकडाऊन से सहमे हालात मे अचानक राजनीतिक गरमाहट पैदा करदी है। होटल मे विधायकों के लगे केम्प मे कांग्रेस, निर्दलीय व बीटीपी के मोजूद विधायको से मुख्यमंत्री व दिल्ली से आये तमाम नेताओं ने सामुहिक तौर के अलावा एक एक विधायक से व्यक्तिगत मिलकर उनकी डिमांड व सुझावों को सूना जिसमे मुस्लिम विधायकों मे विधायक वाजिब अली को छोड़कर होटल मे मोजूद सभी आठ मुस्लिम विधायक अलपसंख्यकों के मुतालिक जायज डिमांड रखने मे फिसड्डी साबित हुये बताते।
          आदिवासी क्षेत्र से आने वाले बीटीपी के दोनो विधायकों के कांग्रेस उम्मीदवारों को समर्थन देने से पहले मुख्यमंत्री व फिर दिल्ली से आये दिग्गज नेताओं से मिलकर अपनी आदीवासी भाइयों के हित की नो सूत्री मांग को लिखित मे देकर उनपर सहमति बनावाकर कांग्रेस द्वारा कायम किये केम्प मे रहना शुरु किया। इसी तरह निर्दलीय विधायकों ने भी एक साथ व अलग अलग रुप मे मुख्यमंत्री व दिल्ली से आये नेताओं को उन्हें तरजीह देने व मंत्रीमंडल मे तेराह मे से कम से कम दो विधायकों को मंत्री बनाने की बात रखकर एक तरह से सहमति बनवाने की चर्चा है। जिसके बाद निर्दलीय विधायक महादेव सिंह खण्डेला व संयम लोडा को मंत्रीमंडल विस्तार मे जगह मिलने की सम्भावना बढ गई है। अनुसूचित जाति न अनुसूचित जन जाती के अलावा किसान वर्ग के विधायकों ने भी अपने अपने वर्ग हित की डिमांड रखी बताते है। 
            सूत्र बताते है कि मुस्लिम समुदाय द्वारा अपने विधायकों से उम्मीद जताई कि राजनीति मे बहुत कम अवसर मिलते है जब मुख्यमंत्री व पार्टी हाईकमान के दिग्गज प्रतिनिधि कुछ मिनटो के लिये नही बल्कि कई दिनो तक उनके मध्य रहकर चला कर उनकी राजनीतिक डिमांड व सुझाव पूछ रहे है। लेकिन मिल रही सूचनाओं अनुसार मुस्लिम विधायकों ने अभी मिले उक्त सुअवसर का किसी भी रुप मे लाभ उठाने की बजाय फिसड्डी साबित हो रहे है। कुछ विधायकों को तो बीना वजह का डर सताये जा रहा बताते है कि अगर जरा सी जबान खोली तो अलग थलक कर दिये जायेगे। कांग्रेस केम्प मे नो मे से मोजूद आठ मुस्लिम विधायको मे से एक दो विधायकों ने सामुहिक तौर पर मिलकर मुख्यमंत्री व शीर्ष नेताओं से डिमांड रखने की कोशिश करने के बावजूद पता नही क्यो सभी विधायक एक साथ बात रखने का सम्भव नही हो पाया।
             राजस्थान मे कांग्रेस को एक तरह से शतप्रतिशत मत देने वाले मुस्लिम समुदाय की अधीकांश समस्याएं मुहं बाये खड़ी है। समुदाय कम से कम जयपुर की होटल मे लगे कांग्रेस व निर्दलीय विधायकों की बाड़ेबंदी मे मोजूद अपने आठो विधायकों ( आमीन खां, शाले मोहम्मद, हाकम अली, सफीया, जाहिदा, दानिश अबरार, आमीन कागजी, रफीक खान) से उम्मीद कर रहा था कि उक्त मिले अवसर मे उनकी जायज मांगो को तो नेताओं के सामने कम से कम बेधड़क पार्टी द्वारा उपलब्ध करवाये मंच पर रखेगे ही। दिल्ली से आये दिग्गज नेताओं व पर्यवेक्षकों ने उक्त विधायकों से अलग अलग व सामुहिक तौर पर मिलकर एक रिपोर्ट भी तैयार की है। सुत्रोनुसार उस रिपोर्ट मे मुस्लिम विधायकों द्वारा किसी तरह की मांग करने का जीक्र तक नही बताते है। मात्र सरकार की वाहवाही करने के अलावा सरकार के कामकाज से संतुष्टि का हवाला होने की चर्चा बताते है।
             बसपा से कांग्रेस मे आये नगर विधायक वाजिब अली के अपने व्यपारीक काम से आस्ट्रेलिया जाने से उनकी गैरमौजूदगी मे कांग्रेस के आठ मुस्लिम विधायक कांग्रेस केम्प मे मोजूद है। उन्हे कम से कम कुछ आवश्यक जायज मांगे तो मुख्यमंत्री व दिग्गज नेताओं के सामने रखनी चाहिये थी। अभी भी उन्नीस जून दूर है। जमीर जगे तो यह मांगे तो रख ही सकते है।

1-राजस्थान के अधिकतम तीस सदस्यों की बाध्यता वाले मंत्रीमण्डल मे कम से कम दो केबिनेट व एक राज्य मंत्री मुस्लिम हो। जिनमे मुख्यधारा वाले विभाग का चार्ज हो।
2- राजनीतिक नियुक्तियों मे मुख्य धारा वाले बोर्ड-निगम व सवैंधानिक पदो मे भी प्रतिनिधित्व मिले।
3-मदरसा बोर्ड को संवैधानिक दर्जा व मदरसा पेरा टीचर्स का जल्द से जल्द स्थायी करण हो। उनका मानदेय कम से कम थर्ड ग्रेड टीचर की सेलेरी के समान हो।
4-मदरसा पेरा टीचर व कम्प्यूटर पेरा टीचर की अटकी भर्ती को जल्द शुरु किया जाये।
5-सरकार द्वारा प्रदेश भर मे खोली जा रही अंग्रेजी माध्यम स्कूलों मे उर्दू पद भी अनिवार्य रुप से विज्ञ्यापित होकर भरे जाये। साथ ही संसकृत भाषा के साथ साथ उर्दू भाषा के पदो की स्वीकृति भी हमेशा एक ही आदेश से जारी करने का प्रावधान हो।
6-अल्पसंख्यक बस्तियों मे पानी-बिजली, चिकित्सा व शिक्षा का माकूल इंतजाम के लिये अलग से जनजाति क्षेत्र की तरहयोजना बनाकर बजट स्वीकृत हो।
7-अल्पसंख्यक शैक्षणिक संस्थाओं को मिलने वाले अल्पसंख्यक संस्था प्रमाण पत्र की जटिलताओं को खत्म कर सरलीकरण करके उनके डवलपमेंट के लिये विशेष योजना बनाकर उसका क्रियान्वयन आवश्यक रुप से हो।
8-सरकारी स्तर पर हर तहसील स्तर पर बालक-बालिकाओ का अलग अलग रुप से अल्पसंख्यक छात्रावास निर्माण की स्वकृति व बजट का एलोकेशन होने के साथ साथ उसके लिये सरकारी जमीन का आवंटन सरकारी स्तर पर सुनिश्चित हर हाल मे हो।
9- वक्फ जायदाद से सरकारी विभागो का अतिक्रमण एक अध्यादेश लाकर उनको खाली करवाया जाये। एवं वक्स बोर्ड को अपनी जमीन से अतिक्रमण हटाने के लिये अलग से थानो का गठन करने की छूट दे।
10-यूनानी चिकित्सा के साथ सरकारी स्तर पर किये जा रहे दोगला व्यवहार खत्म कर अलग से यूनानी विभाग का गठन करके उक्त चिकित्सा पद्धति को बढावा देने के लिये अलग से योजना बनाई जाये। साथ ही यूनानी नर्स की ट्रेनिंग का इंतजाम भी राजस्थान मे सरकार अपने स्तर पर करे। वही कम से कम हर सम्भाग पर जक एक यूनानी सरकारी कालेज खोली जाये।
11- राजस्थान लोकसेवा आयोग के सदस्यों सहित अन्य सवैधानिक पदो मे शैक्षणिक , सामाजी व आर्थिक तौर पर पीछड़े मुस्लिम समुदाय के प्रतिनिधित्व को आवश्यक बनाया जाये।
                   कुल मिलाकर यह है कि मुख्यमंत्री व दिल्ली मे मोजूद कांग्रेस के दिग्गज नेताओं से मिलने का समय बार बार मांगने पर भी राजनीतिक कारणो व उनकी व्यस्तता के चलते नही मिलना आम होना देखा गया है। जबकि इसके विपरीत होटल मे लगे कांग्रेस विधायको के केम्प मे मुख्यमंत्री स्वयं उनके मध्य रहकर एक एक से अलग अलग व सामुहिक तौर पर मिल रहे है। वही दिल्ली के नेता उनके मध्य स्वयं चलकर आ रहे है। विधायकों को मिले ऐसे सुअवसर का मुस्लिम विधायकों को भी लाभ उठाना चाहिए। वरना चूग गई खेत तो फिर पछताय क्या होय। ओर निकल गई गणगोर तो ---मोड़े आयो वाली कहावत चरितार्थ हो सकती है। विधायकों के मुखर होकर अपनी जायज मांगो को उभार कर उन पर सहमति बनाने का यह अब तक मिले अवसरो मे पहला मुफीद अवसर है।