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राजस्थान मे शिक्षा मंत्री ने उर्दू विषय का हाल बेहाल कर रखा है। - शिक्षा मंत्री डोटासरा के निर्वाचन क्षेत्र लक्ष्मनगढ मे उर्दू विषय के साथ सोतेला व्यवहार।
October 2, 2020 • ।अशफाक कायमखानी।


जयपुर।
             राजस्थान के शिक्षा मंत्री के अंतर्गत आने वाले शिक्षा निदेशलय के अधिकारी सोरभ स्वामी द्वारा दो सितंबर को जारी एक विवादास्पद आदेश जिससे स्पष्ट होता है कि अब राजकीय विधालय मे मात्र एक तृतीय भाषा का अध्यापक पदस्थापित होगा। राजस्थान की शिक्षा नीति अनुसार तृतीय भाषा संस्कृत विषय का अध्यापक का पद मुख्य विषयों के साथ स्वीकृत होने के कारण संस्कृत अध्यापक पहले से पदस्थापित होने से अन्य तृतीय भाषा के अध्यापक का उस विधालय मे पदस्थापित होने का उस आदेश से रास्ता बंद करने की उक्त चेष्टाओं के बाद राजस्थान के अल्पसंख्यक समुदाय मे उभाल आया हुवा है। शिक्षा मंत्री डोटासरा की उक्त विषय मे दी जा रही सफाई व उनके दावे की पोल उन्हीं के निर्वाचन क्षेत्र लक्ष्मनगढ के दो दर्जन से अधिक विधालयों मे उर्दू पढने की चाहत रखने वालो स्टुडेंट्स को वहां उर्दू अध्यापक पद  नही होने के कारण मजबूरन संस्कृत पढनी पड़ रही है।
            लाल बहादुर शास्त्री नामक जिस नेता के कहने पर भारत की जनता ने एक समय का भोजन करना छोड़ दिया था उसी देश मे उसी पार्टि के नेता राजस्थान के शिक्षा मंत्री गोविंद डोटासरा प्रदेश मे उर्दू विषय पढने वाले छात्र-छात्राओं व उर्दू अध्यापक पद पर नोकरी पाने वाले इच्छुक युवाओं के सपनो को चकनाचूर करने के तहत झूठ पर झूठ बोलते जा रहे है कि जहां एक भी क्षात्र उर्दू पढना चायेगा उसको उर्दू पढाने के लिये राजकीय विधालयो मे इंतजाम होगा। जबकि उक्त सम्बंध मे प्रदेश मे हो रहा है सब मंत्री के दावे के उलट।
         हालांकि राजस्थान भर मे उर्दू को लेकर डरावनी तस्वीर उभर कर सामने आ रही है लेकिन मंत्री डोटासरा के निर्वाचन क्षेत्र लक्ष्मनगढ मे ही उर्दू के अध्यापक नही होने के कारण धानणी, बाटड़ानाऊ, जेवली, नेछवा, पाटोदा, गाड़ोदा, गनेड़ी, बटोट, खूड़ी, सनवाली, जाजोद, खींवासर, डूडवा, व लक्ष्मनगढ व अन्य गावो स्थित सरकारी विधालयो मे उर्दू अध्यापक का पद नही होने के कारण स्टुडेंट्स को मर्जी के खिलाफ उर्दू के बजाय संस्कृत पढने को मजबूर होना पड़ रहा है। जबकि पीडित छात्र व अभिभावक डोटासरा से गुहार लगाते लगाते थक गये पर मंत्री के कान पर जू तक नही रेग रही है।


             उदाहरण के तौर पर शिक्षा मंत्री डोटासरा के निर्वाचन क्षेत्र लक्ष्मनगढ के खेड़ी गावं के जागरूक व्यक्ति सुबेदार जाफर खा ने बताया कि उनके गावं खेड़ी राडान की राजकीय माध्यमिक विधायक मे 116 छाक्ष छात्राऐ उर्दू पढना चाहते थे। लेकिन उक्त विधालय मे उर्दू विषय का अध्यापक नही होने से उन्हे मजबूरन संस्कृत पढनी पड़ रही है। इसी तरह खींवासर गावं की माध्यमिक विधालय मे उर्दू पढने 86-बच्चे मोजूद है। उन्हें भी मजबूरन संस्कृत विषय पढना पड़ रहि है लक्ष्मनगढ विधानसभा क्षेत्र मे खेड़ी राडान व खींवासर की विधालय मात्र उदाहरण के तौर पर बताया जा रहा है जबकि पूरे क्षेत्र मे प्रदेश के अन्य हिस्सों की तरह ही उर्दू के साथ अन्याय हो रहा है।
               कुल मिलाकर यह है कि राजस्थान के शिक्षा मंत्री गोविंद डोटासरा उर्दू को लेकर प्रभारी महामंत्री अजय माकन के साथ प्रदेश कांग्रेस कार्यलय मे बैठकर फीडबैक लेने के समय व अन्य मोको पर झूठ पर झूठ बोलते हुये अलग तरह के दावे करते आ रहे है, वही उन्हीं के निर्वाचन क्षेत्र लक्ष्मनगढ की अनेको विधालयो से मिल रही रिपोर्ट ही काफी भयावह नजर आ रही है।