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मस्जिद व मंदिरों के जिम्मेदारो की मदद करने पर विचार करना चाहिए।
April 27, 2020 •  ।अशफाक कायमखानी।


            कोविड-19 के कारण जारी लोकडाऊन मे सरकारी दिशा निर्देशोनुसार सभी तरह के धार्मिक इबादत व पूजा स्थलो मे पूजा व इबादत के लिये आम लोगो का आना पूरी तरह बंद हो चुका है। उस हालात मे इमाम व पुजारी अपने स्तर पर सरकारी आदेशों की पालना करते हुये समय पर पूजा व इमाम द्वारा नमाज की अदायगी कर रहे है।
            लोकडाऊन के चलते मंदिरों मे उपलब्ध बिजली व पानी के अलावा अन्य जरुरत के लिये खर्चा तो पहले की तरह ही लग रहा है। एवं भक्तो के ना आने से आमदनी का जरीया कमजोर पड़ चुका है। तो क्षेत्र के जो भक्त पहले जिस तरह से मंदिरों मे दान चढाया करते थे उस तरह से ना सही पर अपनी हैसियत के मुताबिक जो जितना दान दे सकता है, उतना वहां तक पहुंचाने के लिए विचार जरुर करना चाहिए।
                  इसी तरह मस्जिद के इमाम की सैलेरी व रमजान का नजाराना देने का हक तो लोकडाऊन के बावजूद बनता ही है। पानी-बिजली व अन्य प्रकार के खर्चे भी पहले की तरह कायम है। अधीकांश मस्जिद मे जुम्मे के दिन नमाजियों से कुछ चंदे के रुप मे रकम जमा हो जाती थी। जिस चंदे की रकम से प्रबंध समिति मस्जिद के अखराजात को पूरा करने की कोशिश करते थे। लेकिन लोकडाऊन के चलते जुम्मे की नमाज के लिये आम लोगो का मस्जिद आना पूरी तरह बंद हो चुका है।
                 कुल मिलाकर यह है कि हर आदमी अपनी अख्लाकी जिम्मेदारी समझते हुये जो उनसे बन पाता है उतना दान-चंदा मस्जिद व मंदिर के प्रबंध समितियों तक हमेशा की तरह पहुंचाने पर विचार जरुर करना चाहिए।