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कोविड-19 व लोकडाऊन के समय तो जदीद तालीम की अहमियत का अहसास हुवा होगा?
April 21, 2020 • ।अशफाक कायमखानी।


जयपुर।
               कोविड-19 व लोकडाऊन को लेकर चाहे हम भारत भर की बात ना करे पर राजस्थान की ही बात करने पर हमे अब तो अहसास हो गया है कि चाहे हम अपनी धार्मिक तालीम हासिल करे लेकिन जदीद तालीम हासिल करके सिस्टम का हिस्सा नही बनने से हमे कदम कदम पर परेशानियों का सामना करना पड़ा व पड़ना पड़ रहा है।
       कोविड-19 चीन की लेब से लीक हुवा या किया गया  या फिर कुदरत की तरफ से अजमाईस के लिये भेजा गया है। लेकिन इन सब मसलो के मध्य से गुजरते हुये यह तो मानना ही होगा कि अगर हमारे पास इस समय ठीक ठाक जदीद तालीम होती तो हम उतनी दिक्कत पाने के हिस्सेदार नही बन पते जो हम हो रहे है। भला हो राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत व उनकी सरकार के अलग मानवाधिकार व सामाजिक कारकूनो का जिन्होंने समय रहते हालात को समझ कर ढंग से मोर्चा सम्भाल लिया ताकि बडे नुकसान से प्रदेश वासियों को बचा लिया।
                लाखो-करोड़ो की जकात शहर-गावं व गली मोहल्लों से हर साल निकलने के बावजूद उसी क्षेत्र मे कुछ लोग मामूली से लोकडाऊन मे खाने के लिये दाने दाने को तरसने लगे। मा-बहने पांच सो रुपये लेने के लिये बैंक मे चिलचिलाती धूप मे बाहर घंटो कतार मे खड़ी रही हो। दोसो-तीन सो की सरकारी खाद्य सामग्री पाने के लिये लोग जलील हुये हो ओर उनमे से कुछ लोगो को मुकदमे का दंश भी झेलना पड़ा है। जहां एक इबादत गाह मे इबादत करने की सहूलियत आपके पास होने के बावजूद आपने मसलक को ऊपर मानकर बस्ती मे एक नहीं अनेक इबादत गाहे पीछले साले मे लगातार बनाने मे अपन हर तरह का शरमाया खर्च किया। आज कोराना-19 के प्रकोष्ठ के समय उन इबादत गाहो मे जाने से हमको रुकना पड़ा ओर जब हमको जरुरत पड़ी तो वो इबादत गाहो की प्रबंध समितियां नदारत। कठिन दौर मे सख्त जरूरत महसूस हुई अस्पताल ओर जदीद तालीम की। अगर मोहल्ले -गली वाईज ना सही पर बस्ती वाईज आपके पास अगर जकात का सिस्टम पहले से कायम होता तो आज आप वतन व वतन के तमाम भाइयों की खिदमात इस कठिन दौर मे बेहतर ढंग से कर पाते। लेकिन पीछले 70-80 साल मे पता नही क्या हुवा कि जकात कोन उडाकर कर ले गया ओर ले जा रहा है। जो जकात उडाकर ले जाते थे उनमे से एक भी शख्स या इदारा इस संकट की घड़ी मे संकट ग्रस्त लोगो का मददगार साबित नही हो पाया। संकट के दौर मे आपको जरूरत पड़ी  अच्छे चिकित्सक की, सरकारी अहलकार की, पढे लिखे सामाजिक व मानवाधिकार कार्यकर्ताओं की ओर जरूरत पड़ी मेडिकल व अन्य सरकारी विभाग व आपके मध्य सही तरीकें से मध्यस्थता करने वाल दक्ष लोगो की जिसमे आप कमजोर साबित हुये।
             चाहे आप मानने के लिये तैयार हो या नही हो लेकिन मानना होगा कि जब चीन सहित कुछ देशो मे कोविड-19 जैसी महामारी से लोकडाऊन शुरु हो चुका था। भारत मे भी तीस जनवरी को कोराना संक्रमित मरीज मिल चुका था। फिर भी दिल्ली मरकज मे जमातो के जोड़ होते रहे। जिनमे भारत के अलावा उन संक्रमित देशो से भी लोगो ने आकर शिरकत की जहां कोविड-19  अपना असर दिखा चुका था। इसके अलावा तीस जनवरी के बाद भी भारत के हर हिस्से मे जमात भेजने का सीलसीला जारी रखा। फिर पुलिस ने मरकज से जब लोगो को निकाला था उसी समय जमात अमीर मोलाना साद को सामने आकर प्रैस व अन्य जरायो से सारी स्थिति क्लीयर करनी चाहिए थी। पर मोलाना साद आज तक सामने आने के बजाय अज्ञात वास मे ठहरे हुये है। वेष्णो देवी मंदिर, गुरुद्वारा, सतसंग या फिर कोटा मे फसे छात्र व लोगो को लेकर यह कहे कि केवल जमात को ही टारगेट किया जा रहा है। यह मात्र हमारा हमारी कमियो से बचने का बहाना मात्र है। नफरत का माहोल बनाने वाला एक मीडिया के ग्रूप से तो हमेशा उम्मीद भी यही रखनी चाहिए थी। पर आपने मोका तो दिया तब मीडिया ने यह नफरत का खैल खेला ना।
                    समुदाय का एक तबका लगातार हमको जदीद तालीम ( माडर्न ऐजुकेशन) के प्रति उदासीन बनाये रखने की कोशिश करता रहा है। एवं कभी कभी तो उस तबके ने जदीद तालीम का विरोध भी करके समुदाय को गुमराही मे रखने मे अहम किरदार अदा किया है। जकात का बेहतर ढंग से उपयोग करने मे पीछले साल बने राजस्थान के कायमखानी युवाओं द्वारा गठित कायम जकात फाऊंडेशन , से सीखा जा सकता है। फिर बैतुल माल से सीकर की तोसीफ समज सुधार समिति के इस्लामुद्दीन शेख द्वारा चलाई जा रही बीएम स्कीम से भी बहुत कुछ सीखा जा सकता है।
                  तालीम की कमी के कारण लोकडाऊन के बावजूद गली के नुक्कड़ो पर 12 से-22 साल के युवकों का चूंच से चूंच लड़ाकर बैठने व महंगी किमत पर गूटका खरीद कर खाकर रोक के बावजूद थूकते देखा जा सकता है। अगर इन्हीं बच्चों के पास अच्छी तालीम होती तो यह नुक्कड़ो पर बैठकर समय बरबाद करने की बजाय किसी ना किसी रुप मे समय का सदुपयोग करते नजर आते। आज युवाओं को विज्ञान-गणित के अलावा अच्छी जदीद तालीम की सख्त आवश्यकता है। बस्ती बस्ती अच्छे स्कूल व अस्पताल के कायम होने की जरुरत के अलावा बच्चों को अच्छे इदारो मे तालीम दिलवाना आवश्यक हो चुका है। घर घर से वैज्ञानिक, चिकित्सक, इंजीनियर, सीऐ, ब्यूरोक्रेट्स व अन्य तालीम याफ्ता लोगो की सख्त जरुरत का अहसास अब हो चुका है। हरम शरीफ मे जब जमात से नमाज होना रोकी जा चुकी हो। पेगंबर मुहम्मद साहेब की अनेक बताई हिदायतो के बावजूद कुछ लोग लोकडाऊन के बावजूद जमात से नमाज अदा करने की जीद करे तो यह तालीम का ठीक से नही होना ही प्रमुख कारण है।
              भारत मे एक तंजीम व मीडिया का एक तबका मरकज की घटना को लेकर तबलीगी जमातियो के बहाने कोराना फैलाने के लिये मुस्लिम समुदाय को टारगेट करने से बाज अभी तक नही आ रहे। है। जबकि इसके विपरित सबको पता है कि यह कोराना वायरस चीन से निकला वायरस है। जो विदेशो मे टक्कर खाते खते तबाही मचाता भारत आया है। पीछले दिनो अखबारों से पता चला कि हमारी भारतीय नेवी के कुछ जवान भी कोराना पोजेटिव पाये गये है। जबकि उन जवानों का का तो किसी से मिलना भी नही होता है। इस तरह से कोराना के बहाने एक समुदाय को टारगेट करने के बाद अरब जगत के अनेक सामाजिक कारकूनो ने सोशल मीडिया के मार्फत भारत मे हो रही इस तरह की बयान बाजी व घटनाओं के खिलाफ एक अभियान चलाया तो प्रधानमंत्री सहित अनेक नेताओं ने टवीटर पर संदेश जारी करना पड़ा कि कोराना का किसी मजहब से तालूक नही है। इसी के साथ देश मे मोजूद मानवतावादी व सेकुलर जेहन के लोग बडी तादाद मे बाहर आकर गलत का विरोध करते हुये सच्चाई को सामने लाने का हर स्तर पर साहस दिखाया है।
           कुल मिलाकर यह है कि कोविड-19 व लोकडाऊन से निपटने के बाद स्थितियो मे काफी बदलाव आना निश्चित है। यानि जीवन मे काफी कुछ बलला बदला नजर आयेगा। उस स्थितियों मे बने हालातो से उभरने के लिये तंग जेहनियत को त्याग कर जदीद तालीम को पाना व अपनाना होगा। विज्ञान की तरक्की को भी स्वीकार करके उसको मान्यता देते हुये अपनाना होगा। यह भी तय करना है कि मयारी स्कूल/कालेज व अस्पताल कायम करने होगे। घर घर से अच्छे तालीम याफ्ता बच्चों का निकलना सुनिश्चित करना होगा।