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कोविड-19 : सेना में सामने आया पहला मामला, सभी युद्धाभ्यास, प्रशिक्षण स्थगित, देश में 151 मामले
March 18, 2020 • रिपोर्टर्स डाइजेस्ट डेस्क

नयी दिल्ली/लेह, :: लेह में सेना का 34 वर्षीय एक जवान कोरोना वायरस से संक्रमित पाया गया है, जिसके बाद सेना ने निगरानी तंत्र और बढ़ाने के साथ ही अपने युद्धाभ्यास व प्रशिक्षण गतिविधियों को भी टाल दिया है। देश में कोरोना वायरस के कुल मामले बुधवार को बढ़कर 151 पहुंच गए। इस बीच, लोकसभा में एक लिखित जवाब में विदेश राज्य मंत्री वी मुरलीधरन ने कहा कि विदेशों में कोरोना वायरस से संक्रमित कुल भारतीयों की संख्या 276 है जिनमें ईरान में 255, यूएई में 12, इटली में पांच, हांगकांग, कुवैत, रवांडा और श्रीलंका में एक-एक मामले शामिल हैं।

सूत्रों ने कहा कि संक्रमित सैनिक लेह के चुहोट गांव का रहने वाला है और वायरस से संक्रमित अपने पिता के सम्पर्क में आने के कारण वह भी इससे प्रभावित हो गया है। उन्होंने बताया कि उसे सात मार्च को पृथक किया गया था और 16 मार्च को पॉजिटिव पाया गया। सूत्रों ने बताया कि सैनिक का भाई भी पॉजिटिव पाया गया है।

देस में मंगलवार से कोरोना वायरस के 14 नए मामले सामने आए हैं। सेना में हालांकि कोरोना वायरस का यह पहला मामला है जिसके बाद सेना ने इसे लेकर निगरानी और सतर्कता और बढ़ा दी है। देश में इस वायरस से संक्रमित कुल लोगों की संख्या बढ़कर 151 हो गई है जिनमें 25 विदेशी नागरिक हैं तथा तीन वो लोग है जिनकी मौत इस संक्रमण के कारण हो चुकी है। इस बीमारी के कारण दुनिया भर में 7,500 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है जबकि करीब दो लाख लोग इससे संक्रमित हैं।

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के मुताबिक 14 लोगों को अब तक अस्पताल से छुट्टी दी जा चुकी है। इनमें केरल के वो तीन मरीज भी शामिल हैं जिन्हें पिछले महीने छुट्टी दी जा चुकी है।

इसबीच कई लोगों ने खुद को ऐहतियातन पृथक किया है जिनमें पूर्व केंद्रीय मंत्री और भाजपा सांसद सुरेश प्रभु भी शामिल हैं जिन्होंने सऊदी अरब से लौटने के बाद अपने घर पर 14 दिनों तक पृथक रहने का फैसला किया है। प्रभु हालांकि संक्रमण के लिये हुई जांच में निगेटिव पाए गए थे।

सूत्रों ने बताया कि पुणे में कॉलेज ऑफ मिलिट्री इंजिनियरिंग में तैनात एक सैन्य अधिकारी में फ्लू के लक्षण दिखने के बाद उसे स्वयं को पृथक रखने को कहा गया है। उन्होंने कहा कि संस्थान में एक अन्य अधिकारी की पत्नी को भी खुद को पृथक रखने को कहा गया है। दोनों की कोरोना वायरस के संबंध में अभी जांच नहीं हुई है।

मुरलीधरन ने इसके साथ ही एक अन्य सवाल के जवाब में बताया कि ईरान में छह हजार भारतीय नागरिक हैं जिनमें 1100 जायरीन भी शामिल हैं। इनमें से अधिकतर लोग केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख और जम्मू कश्मीर तथा महाराष्ट्र से हैं।

उन्होंने बताया कि जम्मू कश्मीर से करीब 300 छात्र, केरल, तमिलनाडु और गुजरात के करीब एक हजार मछुआरे तथा बाकी लोग ईरान में आजीविका या धार्मिक अध्ययन के लिए गए हुए थे ।

विदेश राज्य मंत्री ने बताया कि जांच के बाद ईरान में फंसे भारतीयों को निकालने के लिए प्रयास किए जा रहे हैं और स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है।

उन्होंने कहा कि जांच और नमूने जुटाने के लिये ईरान में छह भारतीय स्वास्थ्य अधिकारियों का एक दल तैनात किया गया है।

मुरलीधरन ने कहा कि ईरान में फंसे 1,706 भारतीयों के नमूने लिये गए हैं। उन्होंने कहा कि इनकी जांच राष्ट्रीय विषाणु रोग संस्थान समेत कई चिकित्सा केंद्रों पर की गई है।

उन्होंने बताया कि सोमवार को ईरान से 53 भारतीयों का चौथा दल भारत लौटा और इसके साथ ही कोरोना वायरस से प्रभावित इस देश से निकाले गए लोगों की कुल संख्या 16 मार्च तक 389 हो गई है।

कोरोना वायरस का प्रसार रोकने के उद्देश्य से भारतीय राष्ट्रीय रेस्तरां संघ (एनआरएआई) ने अपने सदस्यों से 31 मार्च तक रेस्तरां बंद रखने का आग्रह किया है। साथ ही उसने रेस्तरां बंद रखने की अवधि तब तक बढ़ाने के लिए कहा है जब तक देश में नए मामले सामने आने रुक ना जाएं।

कई राज्यों में विद्यालयों के बंद होने के मद्देनजर उच्चतम न्यायालय ने मध्याहन भोजन की अनुपलब्धता पर स्वत: संज्ञान लिया और राज्यों व केंद्र शासित क्षेत्रों को नोटिस जारी कर पूछा कि बंदी के बीच बच्चों को मध्याहन भोजन कैसे उपलब्ध कराया जा रहा है।