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जोधपुर की बीजेएस कालोनी के मदरसे के रुम मे स्टेडी के लिये बनी लाईब्रेरी को माडल के रुप मे देखना होगा।
May 9, 2020 •    ।अशफाक कायमखानी।

 
जयपुर।
            हालांकि की भारत भर मे मुस्लिम समुदाय की अल अमीन सोसायटी व जकात फाऊंडेशन जैसे अनेक इदारे मुकाबलाती परीक्षा के क्षेत्र मे भी खूब अच्छा काम कर रहे है। राजस्थान के जोधपुर शहर की बीजेएस कालोनी के मुस्लिम समुदाय ने एक अधिकारी मुमताज खान की रुपरेखा मुताबिक मदरसे के मात्र एक कमरे को वातानुकूलित करने के साथ साथ यू टाईप मे उसमे फर्नीचर लगाकर जो स्टेडी रुम तैयार किया है। उसको पुरे राजस्थान मे एक माडल के रुप मे स्वीकार किया जाये तो एक बडा काम हो सकता है।
              हालांकि मेनेजमेंट व इनवेस्टमेंट मे काफी कमजोर माने जाने वाली मुस्लिम समुदाय ने मस्जिद व मदरसे बनाने मे काफी इनवेस्ट किया है। कम से कम हर मस्जिद के लगते एक मदरसा का भवन जरुर आज के समय बना हुवा है। जिन मदरसो मे मामूली तौर पर नाजरा कुरान की पढाई होती है। एवं कुछ जगह तो शादी मे बारात रोकने या अन्य कार्यो मे भी उस मदरसा भवन का उपयोग होता आ रहा है। इस तरह के मकतब के रुप मे चलने वाले मदरसों की वास्तविक हालातो से सभी वाकिफ भी है।
                समुदाय अपने मोजूद सीमित साधनो का भी सही रुप मे उपयोग करे तो जोधपुर की तरह बेहतर परिणाम पाये जा सकते है। जोधपुर बीजेएस कालोनी के मदरसे का मात्र एक कमरा लेकर उसमे करीब लाख रुपया खर्च करके ऐसी लगाकर अच्छा फर्नीचर करके करीब पच्चीस युवाओं के बैठने का इंतजाम करके उसे लाईब्रेरी का रुप देकर विभिन्न कम्पटीशन (परीक्षा) देने वाले युवकों का वहां बैठकर पढने का इंतजाम जो दो साल पहले किया था वो अब मील का पत्थर बनने लगा है। कम खर्च मे अधिक अच्छे परिणाम पाने का यह बेहतरीन तरीका है।
          जोधपुर गरम इलाका होने के कारण स्टुडेंट्स को वातानुकूलित रुम उपलब्ध होने पर पढाई अच्छे से की जायेगी। तभी मदरसे के एक रुम को वातानुकूलित करके उसको वेल फर्निस्ड लाईब्रेरी बनाकर स्टूडेंट्स को सोंपा गया है। जहा मुकाबलाती परीक्षा देने वाले छात्र एक समय मे पच्चीस एक साथ बैठकर स्टेडी कर सकते है। जहां स्टेडी करते समय छात्रो का मुहं दिवार की तरफ व पीट एक दुसरे की पीट की तरफ रहती है। यहां दिन के चोबीस घंटो स्टुडेंट अपनी सहूलियत वाले समय पर आकर स्टेडी करते है।
            माना जाये कि पच्चीस युवा अपने घर पर अलग अलग स्टेडी करे तो उनके घरो मे पच्चीस ऐसी लगाने होते एवं यहां मात्र एक ही ऐसी के खर्च मे पच्चीस युवा स्टेडी कर रहे है। साथ ही पढाई का अच्छा वातावरण व सीनियर से सलाह अलग से मिलना दोहरा लाभ।
           कुल मिलाकर यह है कि जोधपुर की बीजेएस कालोनी के मदरसे के एक कमरे मे बनी वातानुकूलित लाईब्रेरी को माडल मानकर अगर मुस्लिम समुदाय हर मोहल्ले/बस्ती मे कायम मस्जिद या फिर सार्वजनिक मदरसे के एक कमरे मे वातानुकूलित लाईब्रेरी बना कर युवाओं को वहा मुकाबलाती परीक्षा की तैयारी के लिये पढने का स्थान उपलब्ध करवाया जाये तो जल्द ही सुखद परिणाम आ सकते है। मस्जिद व मदरसे मे कायम लाईब्रेरी मे बैठकर बच्चा अगर पढेगा तो वो दीन से जुड़ाव भी रखेगा।