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बढ़े तेल के दामों को वापस ले सरकार : राजनाथ शर्मा - गाँधी भवन में सामूहिक उपवास रखकर जताया विरोध
June 28, 2020 • रिपोर्टर्स डाइजेस्ट डेस्क

बाराबंकी। देश में लगातार 21वें दिन डीजल व पेट्रोल की कीमतों में बढ़ोत्तरी के चलते रविवार को नगर के देवा रोड स्थित गाँधी भवन में गाँधीवादी राजनाथ शर्मा के नेतृत्व में एक दिवसीय उपवास रखा गया।
 
श्री शर्मा ने कहा कि ऐसा पहली बार हुआ है कि डीजल की कीमत पेट्रोल से भी महंगी हो गई है। अन्तर्राष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें काफी निम्न स्तर तक गिर जाने के बावजूद भी केंद्र व प्रदेश सरकार देश में पेट्रोल व डीजल के दामों में निरंतर वृद्धि कर रही हैं। इन बढ़ती कीमतों का असर खास तौर पर देश की आम जनता पर पड़ा हैं। 

श्री शर्मा ने कहा कि पेट्रोल व डीजल के बढ़ते दामों से ट्रांसपोर्ट का खर्च काफी बढ़ चुका है। जिस कारण व्यापारियों को भारी नुकसान उठाना पड़ा रहा है। वहीं किसानों को सिंचाई के लिए डीजल महंगा मिलने से उनकी खेती प्रभावित हो रही है। डॉ लोहिया ने कहा था कि वस्तुओं के दाम बाँधे जाए। जिससे कि खाद्य सामग्रियों के बढ़े मूल्यों को नियंत्रित किया जा सके। सरकार लॉक डाउन से पहले की स्थिति बहाल करे। 

सोशल एक्टिविस्ट रिजवान रजा ने रोष प्रकट करते हुए कहा कि इस बढ़ती महंगाई से आम जनता का जीना दुश्वार हो गया है। केंद्र सरकार को जल्द से जल्द पेट्रोल डीजल के बढे दामों को वापस लेकर आम जनता को राहत देनी चाहिए। ऐसे समय महंगाई रोकने के लिए केंद्र सरकार को डॉ. राम मनोहर लोहिया की ‘दाम बांधो नीति’ अपनानी चाहिए। 

समाजसेवी विनय कुमार सिंह ने कहा कि केन्द्र सरकार जिस तरह पेट्रोल-डीजल के दाम में लगातार बढ़ोत्तरी कर रही है, उससे जनता में त्राहि-त्राहि मच गई है। डीजल के दाम में अभूतपूर्व वृद्धि कर सरकार ने जनता की कमर तोड़ने का काम किया है। 

समाजवादी नेता उमानाथ यादव ‘सोनू’ ने कहा कि देश में महंगाई चरम पर पहुंच रही है। सरकार न महामारी से लड़ पाई और ना ही विदेश नीति में सफल हो पाई। ऐसे में समाजवादी युवजन सभा द्वारा तेल मूल्य वृद्धि के विरुद्ध विधानसभा घेराव किए जाने पर पुलिस द्वारा बर्बरता पूर्वक लाठीचार्ज करके लोकतांत्रिक व्यवस्था का मखौल उड़ाया है।
 
इस मौके उपस्थित सत्याग्रहियों ने सरकार से तेल वृद्धि वापिस लेने की मांग की है। इस मौके पर प्रमुख रूप से मृत्युंजय शर्मा, सत्यवान वर्मा, पी के सिंह, अशोक जायसवाल, पाटेश्वरी प्रसाद, नीरज दुबे, ज्ञान शंकर तिवारी मौजूद रहे।